अन्तर्द्वन्द

नदी के किनारे एक पत्थर पर बैठकर तथा पॉव पानी मे डूबोऐ हुऐ , उसकी कल-कल बहती जलधारा को निहारते हुये बालक शान्त भाव मे मानो आत्म-मंथन मे डूबा हुआ प्रकृति के सौन्दर्यमयी स्वरूप को महसूस करने का प्रयास कर रहा हो । नदी की धारा एक विशाल पत्थर से टकराकर ऐक तालाब का निर्माणContinue reading “अन्तर्द्वन्द”

मैं जाति हूँ (Castiesm )

मैं ब्राह्मण हूँ , सर्वोच्च ज्ञानी हूँ वेदों का भिक्षु हूँ लेकिन मालिक हू ईश्वर के निर्देशों का । कालान्तर में तुम सब मानव में , सर्वोच्च कहलाऊँगा देवताओं से सीधे बात बस मैं ही कर पाऊँगा । तुम सब बलवानो को राजपाट का , सौभाग्य दिलवाऊँगा कमज़ोरों से पूर्व जन्म के पापों को धुलवाऊंगाContinue reading “मैं जाति हूँ (Castiesm )”