काबरू और धूंटू

(काबरू और धूंटू मेरे  बैलों के नाम थे……किसी व्यक्ति या समूह से इनका कोई सम्बन्ध नही है) इतिहास की ओर चलकर देखते है जँहा ईमानदारी और वफादारी की पराकाष्ठा को “हीरा और मोती” नामक बैलों की जोड़ी से समझी जा सकती थी किन्तु जैसे जैसे समय व्यतीत होता गया , आधुनिकता के साथ-साथ मूल्य भीContinue reading “काबरू और धूंटू”