कर्म (a moral story)

(यह ऐक छोटी सी कहानी है जो बचपन की उन बेहतरीन कहानियों मे से ऐक है जिसने मेरे जीवन को बेहद प्रभावित किया है , इसको रचनात्मकता देने के लिये ऐक ताना बाना बुना गया है , उम्मीद है कि यह कहानी सदैव जिन्दा रहेगी – thelostmonk) सुदूर पहाड़ों की घाटी और यमुना नदी केContinue reading “कर्म (a moral story)”

शायर मेरी नज़र से

“शायर मेरी नज़र से” १. बहक जाने दे ऐ वतन तेरी मोहब्बत मे बस यही वो नशा है जो उतरता नही । २.   छुपा लेता है मुस्कुराकर हजारो गुप्तगू ना जाने कितना मर्म दफ़ॉ है सीने मे । ३.    उसकी निगाहों मे डूबे हो लाखों सवाल जैसे न जाने किसे ढूँढती है ,Continue reading “शायर मेरी नज़र से”

छोटा सा सपना

“छोटा सा सपना “ वो आकाश उड़ता जहाज़ और तुम्हारा पायलट बनने का सपना बडे होकर फ़िज़िक्स की उन थ्योरिज और ज़िन्दगी की कॉम्पलीकेटेड उलझनों मे कहीं खो सा गया और तुम आगे निकल गये । होश आने पर जब सिस्टम समझ आया तो मन चंचल , कोमल हृदय को बरगलाता गया कि ज़िन्दगी कीContinue reading “छोटा सा सपना”

दुविधा

दुविधा — “lalit Hinrek” किसान गर्व से कहता था कि मैं अन्न दाता हूं , इस राष्ट्र की ताकत हूं , और भविष्य निर्माता हूं । पर किसान अपने पुत्रों को अब , ‘किसान’ देखना नही चाहता अपने खेतो की खुशबूओं को , लूटते देखना नही चाहता । वो बैलों की जोड़ी तो बस ,Continue reading “दुविधा”

कुछ तो बदला है !

वो बचपन पहाड़ों का बाघों की दहाड़ो का वो बारिश मे काग़ज़ की नावों का मिट्टी लगाये हर घावों का वो तस्वीर , घर मे लगे ताले की गॉव मे हर जर्जर माले की याद दिलाती है कि कुछ तो बदला है ? जो हर ऑगन सूना सूना है । वो लकड़ी के बण्डल ,Continue reading “कुछ तो बदला है !”

क्या चाहता हूँ ?

मेरी कहानियों में डूबा हुआ बस बेसुध सा होना चाहता हूँ । छू ले जो दिल के ज़ख़्मों को कोई वो शायर होना चाहता हूँ । ईश्क में इस क़दर खोना चाहता हूँ कि जैसे बस रोना चाहता हूँ । मिलती नहीं मंज़िल तो क्या हुआ ! राही हूँ , बस दीवाना होना चाहता हूँContinue reading “क्या चाहता हूँ ?”