क्या चाहता हूँ ?

मेरी कहानियों में डूबा हुआ बस बेसुध सा होना चाहता हूँ । छू ले जो दिल के ज़ख़्मों को कोई वो शायर होना चाहता हूँ । ईश्क में इस क़दर खोना चाहता हूँ कि जैसे बस रोना चाहता हूँ । मिलती नहीं मंज़िल तो क्या हुआ ! राही हूँ , बस दीवाना होना चाहता हूँContinue reading “क्या चाहता हूँ ?”