कुछ तो बदला है !

वो बचपन पहाड़ों का बाघों की दहाड़ो का वो बारिश मे काग़ज़ की नावों का मिट्टी लगाये हर घावों का वो तस्वीर , घर मे लगे ताले की गॉव मे हर जर्जर माले की याद दिलाती है कि कुछ तो बदला है ? जो हर ऑगन सूना सूना है । वो लकड़ी के बण्डल ,Continue reading “कुछ तो बदला है !”