शायर मेरी नज़र से

“शायर मेरी नज़र से” १. बहक जाने दे ऐ वतन तेरी मोहब्बत मे बस यही वो नशा है जो उतरता नही । २.   छुपा लेता है मुस्कुराकर हजारो गुप्तगू ना जाने कितना मर्म दफ़ॉ है सीने मे । ३.    उसकी निगाहों मे डूबे हो लाखों सवाल जैसे न जाने किसे ढूँढती है ,Continue reading “शायर मेरी नज़र से”