चार सिपाही और चार कहानी

आज सुबह से कुछ मूड सा ख़राब था तो निर्णय लिया कि कुछ युवा लड़कों को बुलवाकर गॉव मे पास की नदी मे जाकर यात्राऐ करेंगे और कुछ जीवन के अनुभवो को साझा करेंगे । चार लोग और हमारी चार कहानियॉ इस प्रकार से है उम्मीद करता हूँ आपको पसंद आएगी

कहानी १.

इन यात्राओं के दौरान मैंने भी अपने अपने अनुभव साझा किये । ऐक छोटा सा यादगार पल जो हमेशा मेरे ज़ेहन मे आता रहता है । 2004 की बात है मैं दसवीं कक्षा मे पढ़ता था । उत्तराखण्ड बोर्ड के ऐग्जाम थे तो हम सब लोग मेहनत तो करते ही थे । गर्मियो मे ऐग्जाम होने के बाद रिज़ल्ट आने तक 2-3 माह का समय रहता है । पारिवारिक स्थिति अच्छी नही थी और हम पूरा परिवार पिताजी के साथ मिलकर टमाटर की खेती करते थे । जून के प्रथम सप्ताह मे रिज़ल्ट आता था और यह वो दौर था जब मेरे गॉव मे नेटवर्क भी नही होते थे । मैं अपने स्कूलमोट्स के साथ पैदल तीन चार किलोमीटर तक ऐक छोटे से गॉव फेडिज तक गया । वहॉ पहुँचते पहुँचते हिमाचल के फ़ोन टावर्स आते थे । हम लोग बहुत उत्तेजित थे अपने रिज़ल्ट को ले के और डर भी लग कहा था क्योंकि ये वो वक़्त था जब गॉव मे फ़र्स्ट डिवीज़न को भी तीसमार ख़ॉ समझा जाता था ।

फेडिज पुल पहुँचते ही देहरादून मे रहने वाले भैय्या लोगों को कॉल आया सबका रिज़ल्ट पता चला । हम सारे दोस्त पास थे और मेरे 74.82 % थे जो कि हमारे ब्लॉक से उस वक़्त सर्वाधिक थे । हम सब लोग बहुत ज़ोर ज़ोर से चिल्लाऐ , पूरी ताक़त के साथ । सारे बचपन के दोस्त इतने खुश थे जितने शायद आज तक कभी नही हुये । हम लोग मार्केट आये सबको बताया और गॉव मे उस वक़्त फिस्ट का चलन था , जो पास हो जाता था वह ख़ुशी से मोहल्ले मे मिठायी बॉटता था ।

मैं भी बहुत खुश था , भागता हुआ घर गया । पिताजी ने तब तक टमाटर की सिंचाई के लिये नल लगा दिया था । मैने अपने पिता को बताया की मैने टॉप किया है और फिस्ट के लिये पचास रूपये भी मॉगे । मेरे पिता बहुत खुश हुये उन्होंने वो पचास रूपये निकाले और बोला

“बेटा हम पूरी साल मेहनत करते है , तुम्हारे पास ऐसा कुछ नही है जो तुम अपने मॉ बाप को दे सकते हो । हमे पूरे साल इस बात का इन्तज़ार रहता है कि ऐक दिन ऐसा आएगा जब मेरे बच्चे मुझे गिफ़्ट देंगे । बस यही तोहफ़ा था जो तुम दे सकते हो और वो आज तुमने दे दिये , शाबाश बेटा “

मेरी ऑंखें शायद आज भी थोड़ी सी नम हो जाती है इन पलो को याद करके ।

शिक्षा – यदि तुम स्टूडेण्ट्स हो तो इस छोटी सी बात को गहराई से समझो और अपने मॉ बाप को तोहफ़ा देने की कोशिश करो।

कहानी २.

आज मेरे छोटे भाई ने मेरे साथ जीवन के कुछ बेहतरीन पलो के बारे मे बताया । वह कहानी मे यहॉ आपके साथ शेयर कर रहा हूँ ।

रमन जब 11th मे पड़ता था तो उसकी तबियत बेहद ख़राब रहा करती थी जिसकी वजह से उसके छमाही इम्तिहान मे काफ़ी कम मार्क्स आये ।

रमन को अपने इस दौर मे बेहद तनाव का सामना करना पड़ा यहॉ तक कि जब वह अपने गुरूजनों से भी अपने बारे मे कुछ नकारात्मक सुनता तो उसका मन और दुखी हो जाता ।

जनवरी का महीना भी निकल गया रमन के पास मात्र अब ऐक माह बचा था फ़रवरी का क्योंकि मार्च से बोर्ड के ऐग्जाम भी आने वाले थे । रमन ने निर्णय लिया कि वह मेहनत करेगा और अपने बारे मे उड़ रही सभी नकारात्मकता को ख़त्म करेगा । रमन ने टाईम टेबल फ़िक्स किया , सिलेबस को टेबल पर लगाया और उन फ़रवरी के 28 दिनों मे 10-12 घण्टे लगातार मेहनत कर 11th की परिक्षा 86% अंकों से प्राप्त की ।

रमन की यह कहानी उसे हमेशा प्रेरणा देती है आगे बडने की । आज यह कहानी उसने हमे शेयर की मैं आप सब लोगों को शेयर कर रहा हूँ ।

शिक्षा – जीवन उतार चडावो का दौर है लेकिन दृढ़ निश्चय और कठिन परिश्रम सदैव विजयी होता है ।

कहानी ३.

प्रियाशूं , मेरा भॉजा जो अभी गॉव के स्कूल मे ही 12th मे अध्धयनरत है । आज उसके साथ भी यात्रा करने का मौक़ा मिला और उसकी कहानी सुनने का भी ।

दो साल पहले की बात है उसके गॉव क्वानू के ही ऐक ड्राइवर राजू का आना जाना अटाल ऐवम सैंज लगा रहता था । प्रियाशूं दसवीं पास कर चूका था तो वह अक्सर राजू के साथ गाड़ी मे लटक जाया करता था । हालाँकि ताऊ जी (उसके नाना जी ) हमेशा उसे डाँटते थे की तुम पड़ने आये हो ना की गाड़ी मे लोफरपंथी करने लेकिन युवा प्रियाशूं को इन बातो से कोई सरोकार ना था ।

ऐक दिन सुबह सुबह राजू गाड़ी मे सवारी भर के सैंज चला गया । राजू की गाड़ी देख प्रियाशूं भी उसमे लटक गया और सवारी को गॉव छोड़ने के बाद जब राजू गाड़ी वापस रिवर्स कर रहा रहा था तो अचानक गाड़ी पलट गयी लेकिन रोड गॉव के पास होने की वजह से खायी मे वही गयी । किसी को कोई नुक़सान नही हुआ लेकिन इस कटू अनुभव ने प्रियांशु की जीवन मे गहरा प्रभाव डाला अब वह बेवजह फ़ालतू नही घूमता है ।

इस शानदार अनुभव को शेयर करने के लिये धन्यवाद भान्जू ।

शिक्षा – जीवन बहुमूल्य है इसकी क़ीमत पहचानिये , व्यर्थ मे जीवन व्यतीत न करे ।

कहानी ४.

अनिकेत राणा , जो कि रिश्ते मे मेरे चाचा लगते है ।आज उनके साथ यात्रा करने का अवसर मिला । उन्होंने अपने कुछ बेहतरीन पलो को साधा किया । पिछली साल गर्मियो का मौसम था । अनीकेत दो चार अन्य लोगों के साथ डायनामेंट लेकर मछली मारने के लिये गॉवो मे बहने छोटी नदी पर चला गया । गर्मियो के दिनों मे अक्सर लोग नदी मे मछली मारने जाया करते है । अनिकेत और तीन अन्य लोग नदी पहुँच कर डायनामेंट तैयार करने मे लग गये । डायनामेंट फोड़ा गया और ख़ूब मछलियाँ भी मील रही थी । अचानक अनीकेत को ऐक बड़ी सी मछली दिखायी दि , अनिकेत ने तुरन्त ही गोता लगाया और मछली की तरफ़ झपटा किन्तु मछली दो छोटे पत्थरों के अन्दर फँसी हुयी थी । अनिकेत ने हाथ डाला , काई वग़ैरह होने की वजह से हाथ अन्दर तो चला गया किन्तु वापस निकलते हुये फस गया , उसने बहुत कोशिश की लेकिन हाथ नही छूटा । थोड़े समय बाद पानी उसके मुँह मे चला गया और वह छटपटाने लगा उसको लगा जैसे यह उसका आख़िरी दिन हो जैसे लेकिन उसने आख़िरी झटका दिया और हाथ छिटक गया । बाहर निकलते ही उसे उल्टीयॉ हुयी लेकिन साथ वालों को किसी को पता नही चला क्योंकि वो लोग मछली पकड़ने मे व्यस्त थे । इसके बाद अनिकेत ने यह समझ लिया की ज़िन्दगी का कुछ भी भरोसा नही है और वह हमेशा सकारात्मक सोच रखने लग गया ।

इस बेहतरीन अनुभव को साझा करने के लिये शुक्रिया अनिकेत चाचा जी ❣️😊

शिक्षा – धैर्य जीवन की बहुत बड़ी उपलब्धि है , कठिन से कठिन समय मे भी ऐक अन्तिम प्रयास अवश्य करना चाहिये ।

…………………………………धन्यवाद ……………………………………………………………………

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