बर्फ़बारी (Childhood in mountains ⛰)

“बर्फ़बारी ” ~ Lalit Hinrek छिप गयी हरियाली सफ़ेद चादरों मे गुमसूमी है छायी चकोर , वानरों मे ठण्डी मे क्या खॉये बड़ा सवाल हो गया है ! चाय पकौड़ों मे दिल लपलपाये हो चला है सुबह से मॉ ने मेरे कान ढक दिये है ठण्डी की वजह से दस्ताने भी दिये है लेकिन उदण्डीContinue reading “बर्फ़बारी (Childhood in mountains ⛰)”

मुखौटे ~ Lalit Hinrek

वक़्त ठहरता नही है और तुम्हारे सारे आवरण , मुखौटे धरे के धरे रह जाते है । इस तालाब के किनारे क्या ढूँढ रहे हो ? ये उजाले ?? ये परछाईं ही तो है , लौ जो जल रही है वो तो दिल मे है । आज वापस जाकर आइने के सामने खड़े हो जानाContinue reading “मुखौटे ~ Lalit Hinrek”

चार सिपाही और चार कहानी

आज सुबह से कुछ मूड सा ख़राब था तो निर्णय लिया कि कुछ युवा लड़कों को बुलवाकर गॉव मे पास की नदी मे जाकर यात्राऐ करेंगे और कुछ जीवन के अनुभवो को साझा करेंगे । चार लोग और हमारी चार कहानियॉ इस प्रकार से है उम्मीद करता हूँ आपको पसंद आएगी कहानी १. इन यात्राओंContinue reading “चार सिपाही और चार कहानी”

कर्म (a moral story)

(यह ऐक छोटी सी कहानी है जो बचपन की उन बेहतरीन कहानियों मे से ऐक है जिसने मेरे जीवन को बेहद प्रभावित किया है , इसको रचनात्मकता देने के लिये ऐक ताना बाना बुना गया है , उम्मीद है कि यह कहानी सदैव जिन्दा रहेगी – thelostmonk) सुदूर पहाड़ों की घाटी और यमुना नदी केContinue reading “कर्म (a moral story)”

शायर मेरी नज़र से

“शायर मेरी नज़र से” १. बहक जाने दे ऐ वतन तेरी मोहब्बत मे बस यही वो नशा है जो उतरता नही । २.   छुपा लेता है मुस्कुराकर हजारो गुप्तगू ना जाने कितना मर्म दफ़ॉ है सीने मे । ३.    उसकी निगाहों मे डूबे हो लाखों सवाल जैसे न जाने किसे ढूँढती है ,Continue reading “शायर मेरी नज़र से”

छोटा सा सपना

“छोटा सा सपना “ वो आकाश उड़ता जहाज़ और तुम्हारा पायलट बनने का सपना बडे होकर फ़िज़िक्स की उन थ्योरिज और ज़िन्दगी की कॉम्पलीकेटेड उलझनों मे कहीं खो सा गया और तुम आगे निकल गये । होश आने पर जब सिस्टम समझ आया तो मन चंचल , कोमल हृदय को बरगलाता गया कि ज़िन्दगी कीContinue reading “छोटा सा सपना”

दुविधा

दुविधा — “lalit Hinrek” किसान गर्व से कहता था कि मैं अन्न दाता हूं , इस राष्ट्र की ताकत हूं , और भविष्य निर्माता हूं । पर किसान अपने पुत्रों को अब , ‘किसान’ देखना नही चाहता अपने खेतो की खुशबूओं को , लूटते देखना नही चाहता । वो बैलों की जोड़ी तो बस ,Continue reading “दुविधा”

कुछ तो बदला है !

वो बचपन पहाड़ों का बाघों की दहाड़ो का वो बारिश मे काग़ज़ की नावों का मिट्टी लगाये हर घावों का वो तस्वीर , घर मे लगे ताले की गॉव मे हर जर्जर माले की याद दिलाती है कि कुछ तो बदला है ? जो हर ऑगन सूना सूना है । वो लकड़ी के बण्डल ,Continue reading “कुछ तो बदला है !”

क्या चाहता हूँ ?

मेरी कहानियों में डूबा हुआ बस बेसुध सा होना चाहता हूँ । छू ले जो दिल के ज़ख़्मों को कोई वो शायर होना चाहता हूँ । ईश्क में इस क़दर खोना चाहता हूँ कि जैसे बस रोना चाहता हूँ । मिलती नहीं मंज़िल तो क्या हुआ ! राही हूँ , बस दीवाना होना चाहता हूँContinue reading “क्या चाहता हूँ ?”

धारा

मेरा नाम धारा है और ये मेरी कहानी है ।मैं ऐक मध्यम परिवार की लड़की हूँ । मेरा घर छोटे से शहर देहरादून मे है ।मेरे पिता बैंक मे नौकरी करते है और मॉ गृहिणी है । मेरा ऐक छोटा भाई है ।बचपन से परिवार मे लाड़ली रही हूँ । मेरे चचेरे भाईयों की भीContinue reading “धारा”